अमृत दोहे एवं साखी
गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूं पाँय।
बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय॥
भावार्थ: गुरु की महिमा परमात्मा से भी बढ़कर है, क्योंकि गुरु के दिखाए मार्ग से ही गोविंद के दर्शन संभव होते हैं।
दुःख में सुमिरन सब करे, सुख में करै न कोय।
जो सुख में सुमिरन करे, तो दुःख काहे को होय॥
भावार्थ: मनुष्य संकट में प्रभु को याद करता है किंतु सुख में भूल जाता है। यदि सुख में भी स्मरण रहे तो दुख कभी पास नहीं फटकता।
कुल 24 रचनाएँ उपलब्ध
1
प्रभु मेरे अवगुण चित ना धरो
भजन • पारंपरिक
2
जनम तेरा बातों ही बीत गयो
भजन • संत कबीर
3
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा
भजन • पारंपरिक
4
अखियाँ हरी दर्शन की प्यासी
भजन • संत सूरदास
5
जगत माहि संत परम हितकारी
भजन • पारंपरिक
6
सबसे ऊंची प्रेम सगाई
भजन • जगजीत सिंह
7
जग में सुन्दर है दो नाम
भजन • अनूप जलोटा
8
मिलता है सच्चा सुख केवल भगवान तुम्हारे चरणों मे
भजन • पारंपरिक
9
प्रेम मुदित मन से कहो राम राम राम
मंत्र • पारंपरिक
10
बनवारी रे जीने का सहारा तेरा नाम रे
भजन • लता मंगेशकर
11
दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरी अँखियाँ प्यासी रे
भजन • पारंपरिक
12
हे री मैं तो प्रेम-दिवानी मेरो दरद न जाणै कोय
आरती • पारंपरिक
13
घूँघट के पट खोल
भजन • पारंपरिक
14
भाव का भूखा हूँ मैं बस भाव ही एक सार है
भजन • पारंपरिक
15
उठ जाग मुसाफिर भोर भई अब रैन कहाँ जो सोवत है
भजन • पारंपरिक
16
हे महादेव मेरी लाज रहे
भजन • पारंपरिक
17
सूना सूना लागे बृज का धाम
भजन • मोहम्मद रफ़ी
18
इन्साफ का मन्दिर है यह भगवान् का घर है
भजन • पारंपरिक
19
आज भगवन गरीबों के घर आयेंगे
भजन • पारंपरिक
20
आज तुम्हे कहती है रुक्मण रानी
भजन • पारंपरिक
21
अवधपूरी के बाल
भजन • पारंपरिक
22
खोलो माँ बूहे मंदिरा दे खोलो
भजन • पारंपरिक
23
चलो भुलावा आया है माता ने बुलाया है
भजन • नरेन्द्र चंचल
24
शंकर मेरे कब होंगे दर्शन तेरे
भजन • पारंपरिक