जगत माहि संत परम हितकारी

पारंपरिक
विष्णु भगवान भजन गुरुदेव भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

संत परम हितकारी, जगत माहि संत परम हितकारी |

प्रभु पद प्रगट करावे प्रीती, भरम मिटावे भारी |

परम कृपालु सकल जीवन पर, हरि सम सकल दुःख हारी |

त्रिगुन्तीत फिरत तन त्यागी, रीत जगत से नयारी |

ब्रह्मानंद कहे संत की सोबत, मिळत है प्रगट मुरारी |

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।