अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं राम नारायणं जानकी वल्लभम्

मृदुल कृष्ण शास्त्री
श्री कृष्ण भजन भजन मृदुल कृष्ण शास्त्री
॥ दोहा ॥

अच्युत केशव राम नारायण, श्रीधर माधव नाम।
मृदुल कृष्ण जपत सदा, पावे परम धाम॥

॥ चौपाई ॥

अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं।
राम नारायणं जानकी वल्लभम्॥

कौन कहता है भगवान आते नहीं।
तुम मीरा के जैसे बुलाते नहीं॥
अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं।
राम नारायणं जानकी वल्लभम्॥

कौन कहता है भगवान खाते नहीं।
बेर शबरी के जैसे खिलाते नहीं॥
अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं।
राम नारायणं जानकी वल्लभम्॥

कौन कहता है भगवान सोते नहीं।
मां यशोदा के जैसे सुलाते नहीं॥
अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं।
राम नारायणं जानकी वल्लभम्॥

कौन कहता है भगवान नाचते नहीं।
गोपियों की तरह तुम नचाते नहीं॥
मृदुल कृष्ण कहे प्रभु आ ही जाएंगे।
सच्चे भाव से जो उन्हें मनाएंगे॥
अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं।
राम नारायणं जानकी वल्लभम्॥

॥ दोहा ॥

नाम संकीर्तन जो करे, प्रेम भाव उर धार।
मृदुल कृष्ण तर जाए वो, सहजहिं भव के पार॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

भगवान के नाम संकीर्तन और निष्काम भक्तिभाव की महिमा—प्रभु भाव के भूखे हैं और प्रेम से पुकारने पर अवश्य प्रकट होते हैं।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।