आजा संवारे सलोने कन्हैया

साध्वी पूर्णिमा जी (पूनम दीदी)
श्री कृष्ण भजन भजन साध्वी पूर्णिमा
॥ दोहा ॥

नैन बिछाये बैठी राधा, कबहूं आओगे कान्हा।
सुध बिसरी सब अंग अंग की, विरह अगिन तन दाहा॥

॥ चौपाई ॥

आजा संवारे सलोने कन्हैया, तेरी याद सतावे।
अंसुवन जल की धार बहे, मन चैन न पावे॥

यमुना तट पर सूनी गैया, बंसी की धुन तरसावे।
माखन मिश्री लिए यशोदा, बाट तिहारी जोवे॥

आजा संवारे सलोने कन्हैया, तेरी याद सतावे॥

॥ दोहा ॥

दरशन दीजो सांवरे, राखो नेह सगाई।
साध्वी पूर्णिमा विरह में, निसिदिन टेर लगाई॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

श्री कृष्ण के विरह में व्याकुल ब्रजवासियों, गोपियों और माता यशोदा का करुण पुकार भरा भजन।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।