॥ दोहा ॥
नैन बिछाये बैठी राधा, कबहूं आओगे कान्हा।
सुध बिसरी सब अंग अंग की, विरह अगिन तन दाहा॥
॥ चौपाई ॥
आजा संवारे सलोने कन्हैया, तेरी याद सतावे।
अंसुवन जल की धार बहे, मन चैन न पावे॥
यमुना तट पर सूनी गैया, बंसी की धुन तरसावे।
माखन मिश्री लिए यशोदा, बाट तिहारी जोवे॥
आजा संवारे सलोने कन्हैया, तेरी याद सतावे॥
॥ दोहा ॥
दरशन दीजो सांवरे, राखो नेह सगाई।
साध्वी पूर्णिमा विरह में, निसिदिन टेर लगाई॥