कुल 24 रचनाएँ उपलब्ध
1
प्रभु मेरे अवगुण चित ना धरो पारंपरिक
श्री कृष्ण
2
जनम तेरा बातों ही बीत गयो संत कबीर
श्री कृष्ण
3
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा पारंपरिक
श्री गणेश
4
अखियाँ हरी दर्शन की प्यासी संत सूरदास
श्री कृष्ण
5
जगत माहि संत परम हितकारी पारंपरिक
विष्णु भगवान
6
सबसे ऊंची प्रेम सगाई जगजीत सिंह
श्री कृष्ण
7
जग में सुन्दर है दो नाम अनूप जलोटा
श्री कृष्ण
8
मिलता है सच्चा सुख केवल भगवान तुम्हारे चरणों मे पारंपरिक
अन्य
9
प्रेम मुदित मन से कहो राम राम राम पारंपरिक
महादेव
10
बनवारी रे जीने का सहारा तेरा नाम रे लता मंगेशकर
श्री कृष्ण
11
दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरी अँखियाँ प्यासी रे पारंपरिक
श्री कृष्ण
12
हे री मैं तो प्रेम-दिवानी मेरो दरद न जाणै कोय पारंपरिक
श्री कृष्ण
13
घूँघट के पट खोल पारंपरिक
अन्य
14
भाव का भूखा हूँ मैं बस भाव ही एक सार है पारंपरिक
अन्य
15
उठ जाग मुसाफिर भोर भई अब रैन कहाँ जो सोवत है पारंपरिक
अन्य
16
हे महादेव मेरी लाज रहे पारंपरिक
महादेव
17
सूना सूना लागे बृज का धाम मोहम्मद रफ़ी
श्री कृष्ण
18
इन्साफ का मन्दिर है यह भगवान् का घर है पारंपरिक
अन्य
19
आज भगवन गरीबों के घर आयेंगे पारंपरिक
अन्य
20
आज तुम्हे कहती है रुक्मण रानी पारंपरिक
श्री कृष्ण
21
अवधपूरी के बाल पारंपरिक
श्री राम
22
खोलो माँ बूहे मंदिरा दे खोलो पारंपरिक
माता दुर्गा
23
चलो भुलावा आया है माता ने बुलाया है नरेन्द्र चंचल
माता दुर्गा
24
शंकर मेरे कब होंगे दर्शन तेरे पारंपरिक
महादेव