आज तुम्हे कहती है रुक्मण रानी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

आज तुम्हे कहती है रुक्मण रानी,

आवीं कुण्डला वालेया, आवीं हारा वालेया ||

पिता मेरे ने मन मे विचारा, वर ले रुक्मण श्याम प्यारा |

भाई मेरे ने जुलम कमाया, शिशुपाल वेआवन आ गया ||

रुक्मण रानी लिख रही पाती, श्याम सुन्दर मेरे बन जाओ साथी |

दासी तेरी अरज गुजरे, शिशुपाल वेआवन आ गया ||

विप्र तुर पड़े रात बाराती, जा मोहन को दीनी पाती |

पाती पड़ कर ला ली छाती, और रथ को खूब सजा लिया ||

मोहन तुर पड़े सुबह सवेरे, जा मन्दिर मे ला लाये डेरे |

रुक्मण आई करने पूजा, बाजु पकड़ रथ मे बिठा लिया ||

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।