अच्युतम केशवम कृष्ण दामोदरम

पारंपरिक भजन
श्री कृष्ण भजन भजन कृष्ण
॥ दोहा ॥

अच्युतं केशवं रामनारायणं, कृष्णदामोदरं वासुदेवं हरिम्।
श्रीधरं माधवं गोपिकावल्लभं, जानकीनायकं रामचंद्रं भजे॥

॥ चौपाई ॥

अच्युतम केशवम कृष्ण दामोदरम, राम नारायणम जानकी वल्लभम॥

कौन कहते हैं भगवान आते नहीं, तुम मीरा के जैसे बुलाते नहीं।
अच्युतम केशवम कृष्ण दामोदरम, राम नारायणम जानकी वल्लभम॥

कौन कहते हैं भगवान खाते नहीं, बेर शबरी के जैसे खिलाते नहीं।
अच्युतम केशवम कृष्ण दामोदरम, राम नारायणम जानकी वल्लभम॥

कौन कहते हैं भगवान सोते नहीं, लोरी यशोदा के जैसे सुनाते नहीं।
अच्युतम केशवम कृष्ण दामोदरम, राम नारायणम जानकी वल्लभम॥

कौन कहते हैं भगवान नाचते नहीं, गोपियों की तरह तुम नचाते नहीं।
अच्युतम केशवम कृष्ण दामोदरम, राम नारायणम जानकी वल्लभम॥

॥ दोहा ॥

नाम जपते चलो काम करते चलो, हर समय कृष्ण का ध्यान धरते चलो।
अच्युतम केशवम कृष्ण दामोदरम, राम नारायणम जानकी वल्लभम॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

भगवान श्री कृष्ण और श्री राम के नामों का यह लोकप्रिय भजन बताता है कि यदि भक्त का प्रेम मीरा, शबरी और यशोदा जैसा निष्कपट हो तो भगवान सदा उपस्थित रहते हैं।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।