सबसे ऊंची प्रेम सगाई

जगजीत सिंह
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सबसे ऊंची प्रेम सगाई

दुर्योधन के मेवा त्याग्यो, साग विदुर घर खाई |

जूठे फल शबरी के खाये, बहु विधि स्वाद बताई |

राजसूय यज्ञ युधिष्ठिर कीन्हा, तामे जूठ उठाई |

प्रेम के बस पारथ रथ हांक्यो, भूल गये ठकुराई |

ऐसी प्रीत बढ़ी वृन्दावन, गोपियन नाच नचाई |

प्रेम के बस नृप सेवा कीन्हीं, आप बने हरि नाई |

सूर क्रूर एहि लायक नाहीं, केहि लगो करहुं बड़ाई |

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।