सूना सूना लागे बृज का धाम

मोहम्मद रफ़ी
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सूना सूना लागे बृज का धाम,

गोकुल को छोड़ चले रे घन्श्याम |

यमुना रोए, मधुबन रोए, यमुना रोए, रोए कदम की शय्या,

भर भर नैना रोए रे गवाले, रोये बृज की गईआं |

राह रोक कर रोए मनसुखा, बिशड रहे मोरे श्याम रे ||

बोल सके ना घर के पंशी, असुअन से भरे नैना,

आजा काहना, ना ज काहना, कूके रे पिंजरे की मैना |

नदिया रोये, गिरिवर रोये, ले कहना का नाम रे ||

प्रेम दीवानी राधा रानी, भर नैना में पानी,

सुबक सुबक कहे हाय रे कहना, तुने बिरहा की पीर ना जानी |

कैसे कटेगी, तुम बिन साथी जीव की अब श्याम रे ||

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।