उठ जाग मुसाफिर भोर भई अब रैन कहाँ जो सोवत है

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॥ पावन पाठ ॥

उठ जाग मुसाफिर भोर भई, अब रैन कहाँ जो सोवत है |

जो सोवत है सो खोवत है, जो जगत है सोई पावत है ||

टुक नींद से अखियाँ खोल जरा, और अपने प्रभु में ध्यान लगा |

यह प्रीत कारन की रीत नहीं, रब जागत है तू सोवत है ||

जो कल करना सो आज करले , जो आज करे सो अभी करले |

जब चिड़िया ने चुग खेत लिया, फिर पश्त्यते क्या होवत है ||

नादान भुगत अपनी करनी, ऐ पापी पाप मै चैन कहाँ |

जब पाप की गठड़ी सीस धरी, अब सीस पकड़ क्यूँ रोवत है ||

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।