खोलो माँ बूहे मंदिरा दे खोलो

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

खोलो माँ बूहे मंदिरा दे खोलो |

कद दा खड़ा आवजा मारा, मेरे बोल सुनो, कुझ बोलो ||

भगतां नाल मे आया रल के,

बैठ गया तेरा बूहा मल के |

मावां बिना पुत रुल जांदे ने,

मैनू इन्झ ना रोलो माँ ||

करमा दे कंडेयां नू कौन चुनेगा,

तू ना सुनेगी ता कौन सुनेगा |

पथरों भारे अवगुण मेरे,

तकड़ी विच ना तोलो माँ ||

ऐसा कुज लिख दे विच लेखां,

तू मेनू मै तेनु वेखा |

बंसी दास नू कोल बिठा के,

बह के दुःख सुख फोलो माँ ||

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।