शंकर मेरे कब होंगे दर्शन तेरे

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

ओ शंकर मेरे कब होंगे दर्शन तेरे |

जीवन पथ पर, शाम सवेरे छाए है घनघोर अँधेरे ||

मै मूरख तू अंतरयामी,

मै सेवक तू मेरा स्वामी |

काहे मुझ से नाता तोडा,

मन छोड़ा, मन्दिर भी छोड़ा,

कितनी दूर लगाये तूने जा कैलाश पे डेरे ||

तेरे द्वार पे जोत जगाते,

युग बीते तेरे गुण गाते |

ना मांगू मैं हीरे मोती,

मांगू बस थोड़ी सी ज्योति |

खली हाथ ना जाऊंगा मैं,

दाता द्वार से तेरे ||

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।