अवधपूरी के बाल

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

जिनू राज सवेरे मिलना सी, एक रात दे विच वो फ़कीर भया |

अवधपूरी के बाला दी दस कौन बदल तकदीर गया ||

वनवासी दा भेस बना के, राम लखन दो भाई,

अंग-संग है राज दुलारी, सीता जैसी माई |

एह गल सुन के हर दिल रोया, अखिओं से बह नीर गया ||

सूरज कुल के सूरज जाके लाया वनों मे डेरा,

दूर होया प्रकाश अवध का, छाया घोर अँधेरा |

यह गल सुन के दशरथ मोया, अखिओं से बह नीर गया ||

राम लखन और जनक दुलारी, जा के बना दे विच रहना

भूख प्यास और सर्दी गर्मी, सो सो दुखड़े सहना |

एह गल सुन के हर दिल रोया, पथरान चो बह नीर गया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।