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कभी राम बनके कभी श्याम बनके
पारंपरिक भजन
श्री राम
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मुझे अपने ही रंग में रंग ले मेरे यार सांवरे
साध्वी पूर्णिमा जी (पूनम दीदी)
श्री कृष्ण
34179
पकड़ लो हाथ बनवारी नहीं तो डूब जाएंगे
देवी चित्रलेखा
श्री कृष्ण
34180
जब कोई नहीं आता मेरे श्याम आते हैं
देवी चित्रलेखा
श्री कृष्ण
34181
मन लाग्यो मेरो यार फकीरी में (कबीर भजन)
संत कबीरदास
अन्य
34182
वृंदावन जाऊंगी सखी री मेरी कुटिया वहीं बनाऊंगी
साध्वी पूर्णिमा जी (पूनम दीदी)
श्री कृष्ण
34183
कन्हैया ले चल परली पार
संजय मित्तल
श्री कृष्ण
34184
किशोरी कुछ ऐसा इंतज़ाम हो जाए जुबां पे राधा राधा नाम हो जाए
देवी चित्रलेखा
श्री कृष्ण
34185
मंगल भवन अमंगल हारी (रामचरितमानस चौपाई संकलन)
गोस्वामी तुलसीदास
श्री राम
34186
मेरी विनती यही है राधा रानी कृपा बरसाए रखना
साध्वी पूर्णिमा जी (पूनम दीदी)
अन्य
34187
छलिया का भेष बनाया श्याम चूड़ी बेचने आया
साध्वी पूर्णिमा जी (पूनम दीदी)
श्री कृष्ण
34188
हारा हूँ बाबा पर तुझपे भरोसा है (जीत का भरोसा)
संजय मित्तल
अन्य
34189
कभी प्यासे को पानी पिलाया नहीं बाद अमृत पिलाने से क्या फायदा
देवी चित्रलेखा
श्री कृष्ण
34190
मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई
मीरा बाई
श्री कृष्ण
34191
अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो
साध्वी पूर्णिमा जी (पूनम दीदी)
श्री कृष्ण
34192
जब जब भी इसे पुकारा है मेरे श्याम ने दिया सहारा है
संजय मित्तल
अन्य
34193
कान्हा रे थोड़ा सा प्यार दे अपने ही रंग में रंग ले
देवी चित्रलेखा
श्री कृष्ण
34194
ओ पालनहारे निर्गुण और न्यारे
जावेद अख्तर
अन्य
34195
बांके बिहारी मुझको देना सहारा कहीं छूट जाए न दामन तुम्हारा
साध्वी पूर्णिमा जी (पूनम दीदी)
श्री कृष्ण
34196
जो राम को लाए हैं हम उनको लाएंगे
कन्हैया मित्तल
श्री राम
34197
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो
मीरा बाई
श्री राम
34198
राधे राधे जपो चले आएंगे बिहारी आएंगे बिहारी चले आएंगे बिहारी
देवी चित्रलेखा
श्री कृष्ण
34199
तीन बाण के धारी मेरे बाबा लखदातारी
संजय मित्तल
अन्य
34200
बांके बिहारी मुझको देना सहारा कहीं छूट जाए न दामन तुम्हारा
मृदुल कृष्ण शास्त्री
श्री कृष्ण