बांके बिहारी मुझको देना सहारा कहीं छूट जाए न दामन तुम्हारा

मृदुल कृष्ण शास्त्री
श्री कृष्ण भजन भजन मृदुल कृष्ण शास्त्री
॥ दोहा ॥

वृंदावन सो वन नहीं, नन्दगाँव सो गाँव।
बंशीवट सो वट नहीं, कृष्ण नाम सो नाँव॥

॥ चौपाई ॥

बांके बिहारी मुझको देना सहारा।
कहीं छूट जाए न दामन तुम्हारा॥
बांके बिहारी मुझको देना सहारा॥

तेरे सिवा मेरा कोई नहीं है।
किस्मत मेरी प्रभु तूने रची है॥
मेरी नैया को प्रभु देना किनारा।
कहीं छूट जाए न दामन तुम्हारा॥

दुनिया के झूठे रिश्तों से हारा।
तेरे ही द्वारे पे आके पुकारा॥
तू ही तो है मेरे प्राणों से प्यारा।
कहीं छूट जाए न दामन तुम्हारा॥

मृदुल कृष्ण गाए महिमा तुम्हारी।
कृपा दृष्टि रखना हे कुंजबिहारी॥
चरणों में तेरे है जीवन गुजारा।
कहीं छूट जाए न दामन तुम्हारा॥

॥ दोहा ॥

करुणा सिंधु दीनबंधु बांकेबिहारी लाल।
मृदुल कृष्ण शरण पड़े राखहु सदा दयाल॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

पूज्य श्री मृदुल कृष्ण शास्त्री जी द्वारा गाया गया परम लोकप्रिय भजन, जिसमें भक्त बांके बिहारी जी से जीवन के भवसागर में उनका पावन दामन थामे रहने और सदा सहारा प्रदान करने की आर्त प्रार्थना करता है।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।