मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई

मीरा बाई
श्री कृष्ण भजन भजन मीरा बाई
॥ दोहा ॥

मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई।
जाके सिर मोर मुकुट मेरो पति सोई॥

॥ चौपाई ॥

तात मात भ्रात बंधु आपनो न कोई।
छांड़ि दई कुल की कानि कहा करिहै कोई॥

संतन ढिग बैठि बैठि लोक लाज खोई।
अंसुवन जल सींचि सींचि प्रेम बेलि बोई॥

दधि मथि घृत काढ़ि लियो डारि दई छोई।
भगत देखि राजी हुई जगत देखि रोई॥

दासी मीरा लाल गिरधर तारो अब मोई।
मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई॥

॥ दोहा ॥

मीरा के प्रभु सदा सहाई, राखे नेह सगाई।
चरण कँवल की दासी मीरा, प्रभु चरनन चित लाई॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

भक्त शिरोमणि मीरा बाई का यह कालजयी भजन सांसारिक मोह त्यागकर केवल गिरधर गोपाल के चरणों में पूर्ण समर्पण का अमर प्रतीक है।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।