॥ दोहा ॥
बांके बिहारी तेरे चरणों की रज पाऊं।
तू जो थामे हाथ तो भव पार तर जाऊं॥
॥ चौपाई ॥
बांके बिहारी मुझको देना सहारा, कहीं छूट जाए न दामन तुम्हारा।
बांके बिहारी मुझको देना सहारा॥
तेरे सिवा मेरा कोई नहीं है, दुनिया में अब आसरा न किसी का।
मँझधार में है नैया हमारी, तुम ही खिवैया बनो बनवारी॥
दीन अनाथ की लाज बचा लो, अपने गले से मुझको लगा लो।
भव के थपेड़ों से मुझको बचाना, तेरा ही नाम है जग में सहारा॥
बांके बिहारी मुझको देना सहारा, कहीं छूट जाए न दामन तुम्हारा॥
॥ दोहा ॥
श्री बांके बिहारी लाल की जय, जय जय श्यामा श्याम।
निसिदिन गावे पूर्णिमा, पावे परम विश्राम॥