बांके बिहारी मुझको देना सहारा कहीं छूट जाए न दामन तुम्हारा

साध्वी पूर्णिमा जी (पूनम दीदी)
श्री कृष्ण भजन भजन साध्वी पूर्णिमा
॥ दोहा ॥

बांके बिहारी तेरे चरणों की रज पाऊं।
तू जो थामे हाथ तो भव पार तर जाऊं॥

॥ चौपाई ॥

बांके बिहारी मुझको देना सहारा, कहीं छूट जाए न दामन तुम्हारा।
बांके बिहारी मुझको देना सहारा॥

तेरे सिवा मेरा कोई नहीं है, दुनिया में अब आसरा न किसी का।
मँझधार में है नैया हमारी, तुम ही खिवैया बनो बनवारी॥

दीन अनाथ की लाज बचा लो, अपने गले से मुझको लगा लो।
भव के थपेड़ों से मुझको बचाना, तेरा ही नाम है जग में सहारा॥

बांके बिहारी मुझको देना सहारा, कहीं छूट जाए न दामन तुम्हारा॥

॥ दोहा ॥

श्री बांके बिहारी लाल की जय, जय जय श्यामा श्याम।
निसिदिन गावे पूर्णिमा, पावे परम विश्राम॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

वृंदावन के ठाकुर श्री बांके बिहारी जी के चरणों में पूर्ण शरणागति और संकट के समय प्रभु के पावन दामन को थामे रखने का मार्मिक भजन।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।