श्री राम जय राम जय जय राम

समर्थ रामदास परंपरा
श्री राम भजन भजन राम
॥ दोहा ॥

श्री राम जय राम जय जय राम।
श्री राम जय राम जय जय राम॥

॥ चौपाई ॥

राम नाम के दो अक्षर में, सब जग का सुख समाया।
जिसने राम नाम रस पीया, उसने सब कुछ पाया॥
श्री राम जय राम जय जय राम...

उलटा नाम जपत जग जाना, बाल्मीकि भये ब्रह्म समाना।
राम नाम जपि मिटहिं कलेशा, सुख पावैं जग में नर ऐसा॥
श्री राम जय राम जय जय राम...

दीनबंधु सुखसिंधु विधाता, राम हमारे भाग्य विधाता।
भवसागर से पार लगावे, जो प्रभु के गुण गावे॥
श्री राम जय राम जय जय राम...

॥ दोहा ॥

कलयुग केवल नाम अधारा, सुमिरि सुमिरि नर उतरहिं पारा।
श्री राम जय राम जय जय राम॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

समर्थ रामदास जी द्वारा प्रचारित यह त्रयोदशाक्षर तारक महामंत्र चित्त को परम विश्रांति और जन्म-मरण के भय से मुक्ति प्रदान करता है।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।