॥ दोहा ॥
श्री राम जय राम जय जय राम।
श्री राम जय राम जय जय राम॥
॥ चौपाई ॥
राम नाम के दो अक्षर में, सब जग का सुख समाया।
जिसने राम नाम रस पीया, उसने सब कुछ पाया॥
श्री राम जय राम जय जय राम...
उलटा नाम जपत जग जाना, बाल्मीकि भये ब्रह्म समाना।
राम नाम जपि मिटहिं कलेशा, सुख पावैं जग में नर ऐसा॥
श्री राम जय राम जय जय राम...
दीनबंधु सुखसिंधु विधाता, राम हमारे भाग्य विधाता।
भवसागर से पार लगावे, जो प्रभु के गुण गावे॥
श्री राम जय राम जय जय राम...
॥ दोहा ॥
कलयुग केवल नाम अधारा, सुमिरि सुमिरि नर उतरहिं पारा।
श्री राम जय राम जय जय राम॥