रघुपति राघव राजा राम

श्री लक्ष्मणाचार्य / पारंपरिक संकलन
श्री राम भजन भजन राम
॥ दोहा ॥

रघुपति राघव राजा राम, पतित पावन सीता राम।
सुंदर विग्रह मेघश्याम, गंगा तुलसी शालिग्राम॥

॥ चौपाई ॥

रघुपति राघव राजा राम, पतित पावन सीता राम॥

भद्राम्भोधौ तरणिकल्पं, भद्रं भद्रं भुवनं सर्वं।
सीता राम सीता राम, भज प्यारे तू सीता राम॥

ईश्वर अल्लाह तेरो नाम, सब को सन्मति दे भगवान।
रघुपति राघव राजा राम, पतित पावन सीता राम॥

राम रहीम करीम समान, हम सब हैं तेरी संतान।
सब पर दया करो भगवान, रघुपति राघव राजा राम॥

रात को निंदिया दिन को काम, कभी भजो तुम सीता राम।
रघुपति राघव राजा राम, पतित पावन सीता राम॥

॥ दोहा ॥

जय रघुनंदन जय घनश्याम, पतित पावन सीता राम।
सबके स्वामी राजा राम, सबके दाता सीता राम॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

भारत का यह सर्वाधिक लोकप्रिय संकीर्तन प्रभु श्री राम के मंगलमय स्वरूप का स्मरण कराते हुए प्रेम, बंधुत्व और शांति का संदेश देता है।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।