॥ दोहा ॥
रघुपति राघव राजा राम, पतित पावन सीता राम।
सुंदर विग्रह मेघश्याम, गंगा तुलसी शालिग्राम॥
॥ चौपाई ॥
रघुपति राघव राजा राम, पतित पावन सीता राम॥
भद्राम्भोधौ तरणिकल्पं, भद्रं भद्रं भुवनं सर्वं।
सीता राम सीता राम, भज प्यारे तू सीता राम॥
ईश्वर अल्लाह तेरो नाम, सब को सन्मति दे भगवान।
रघुपति राघव राजा राम, पतित पावन सीता राम॥
राम रहीम करीम समान, हम सब हैं तेरी संतान।
सब पर दया करो भगवान, रघुपति राघव राजा राम॥
रात को निंदिया दिन को काम, कभी भजो तुम सीता राम।
रघुपति राघव राजा राम, पतित पावन सीता राम॥
॥ दोहा ॥
जय रघुनंदन जय घनश्याम, पतित पावन सीता राम।
सबके स्वामी राजा राम, सबके दाता सीता राम॥