जो सूरज को पूजे उसका हो वेडा पार

पारंपरिक
सूर्य देव भजन विविध भजन surya
॥ पावन पाठ ॥

जो सूरज को पूजे उसका हो वेडा पार,

श्रिष्टि का वो सर्जन हार सब का है वो पालनहार,

करता है वो ही संहार नमन करे उसको संसार

भोर भये जो अरग उसे दे लेकर दवादश नाम,

मन वंचित फल पाये उसके सबरे सब ही काम,

सूर्य की महिमा है अप्रम पार,

श्रिष्टि का वो सर्जन हार सब का है वो पालनहार,

करता है वो ही संहार नमन करे उसको संसार

जो सूरज को पूजे ....

सब जीवो में प्राण है वो ही,

सूर्य का रूप है ज्ञान,

नेत्र जगत के है सूर्य ही देता प्रकाश का दान,

सूर्य मिटाये हर अधिकार,

श्रिष्टि का वो सर्जन हार सब का है वो पालनहार,

करता है वो ही संहार नमन करे उसको संसार

जो सूरज को पूजे ....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।