जाऊँ कहाँ तजि चरन तुम्हारे

संत तुलसीदास
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

जाऊँ कहाँ तजि चरन तुम्हारे,

काको नाम पतित पावन जग,केहि अति दीन पियारे,

कौन देव बिराई बिरद हित,हठि हठि अधम उधारे,

खग मृग व्याध पाषाण बिटप जड,यवन कवन सुर तारे,

जाऊँ कहाँ तजि चरन तुम्हारे.....

देव दनुज मुनि नाग मनुज सब,माया बिबस बिचारे,

तिनके हाथ दास तुलसी प्रभु कहां अपनपौ हारे,

जाऊँ कहाँ तजि चरन तुम्हारे......

गोस्वामी तुलसीदास

गायक -राजकुमार भारद्वाज

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।