तेरे मंदिरों मे अमृत बरसे माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तेरे मंदिरों मे अमृत बरसे माँ, तेरे मंदिरों मे अमृत बरसे माँ |

तेरे भक्तों के मन की प्यास बुझी, अब रूह किसी की ना तरसे माँ ||

भक्ति के सागर मे भक्तो ने आज लगाये गोते |

इस अमृत मे भीग के कागा, हंस है छिन मे होते |

वो लोग बड़े ही बदकिस्मत, जो आज ना निकले घर से माँ ||

नाम के रस की इस धरा मे आत्मा जब है बहती |

जग की नश्वर चीजों की फिर तलब उसे ना रहती |

कहीं और यह मस्ती मिलती नहीं, जो मिलती है तेरे दर से माँ ||

इन छीटों से जन्म जन्म की मैल सभी धुल जाती |

मिट जाता अन्धकार दिलों का आखे है खुल जातीं |

शैतान भी साधू बनते सुने, तेरे नाम की मस्त लहर से माँ ||

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।