मेरे गुरु रविदास ने बल्ले बल्ले

संत रविदास
सूर्य देव भजन गुरुदेव भजन surya
॥ पावन पाठ ॥

तू ही दिति एह दलेरी दूर किती है हनेरी,

आस सबना दे दिल दी पुगाई होइ है जी,

मेरे गुरु रविदास ने बल्ले बल्ले जग ते कराई होइ है,

मेरे गुरु रविदास ने...

रविदास गुरु जी सोहनी दुनिया सजा गे,

इक सार बंदे सारे वाणी च बता गये,

साडी ज़िंदगी स्वर्ग बनाई होइ आ,

मेरे गुरु रविदास ने ....

कोई छड़ी न कसर आसमानी गुड्डी ले,

औरता न इजत दलाई होइ है मेरे बाबा भीम रओ ने,

बल्ले बल्ले जग ते कराई होइ आ मेरे बाबा भीम रओ ने,

पंयेल वाला लाडी तेरा करे सतिकार जी,

रविराज राजन दा दाता लावइ बेडा पार जी,

जीवे गंगा उते पत्थर तराई होइ आ जी,

बल्ले बल्ले जग ते कराई ......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।