जय कामधेनु गैया जय कपिला मैया

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

जय कामधेनु गैया, जय जय जय कपिला मैया |

तेरे कारन ग्वाल बनो नटनागर कृषण कन्हिया ||

नंदनी तू सागर की, नंदिगन की माता |

पंचगव्य अमृत की मैया तू है दाता ||

सिंह विराजत विष्णु और शीश पे तेरे ब्रह्मा |

भाल पे तेरे भोले शंकर, भगिनी तेरी राम ||

सिन्धु तेरे संग, जीब मे सरस्वती |

वेद चारों पाओ मे, कंठ तेरे पार्वती ||

गो मय मे है लक्ष्मी, गो मूत्र मे है गंगा |

मुख मे तेरे अग्नि, पूछ मे तेरे रम्भा ||

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।