गंगा जमुना के संगम पर

पारंपरिक
माता सरस्वती भजन विविध भजन saraswati
॥ पावन पाठ ॥

गंगा जमुना के संगम पर मेला लगा अपार है,

लगा के डुबकी पाप काटता देखो यह संसार है,

है पतित पावन गंगाजी जमुना की निर्मल धारा है,

संगम स्थल पर सरस्वती मिलकरके उन्हें सवांरा है,

पावन प्रयाग यह तीर्थराज सारी दुनिया से न्यारा है,

उस भव्य त्रिवेणी संगम को सौबार प्रणाम हमारा है,

पावन जल से भक्त आचमन करता बारम्बार है,

इसी भूमि पर रिष मुनियों ने मोक्षमार्ग को पाया था,

भरतद्वाज ने इसी भूमि पर निज उपदेश सुनाया था,

राम नाम की कथा हजारों बार यहीं पर गाय था,

केवट से श्रीरामचन्द्रजी अपना चरण धुलाया था,

करने से स्नान यहां सब होते भाव से पार है,

तपोभूमि है यह पावन इसमे है कोई पर नही,

जो नर यहां नही आते उनका होता उद्धार नही,

कहो भला किस हिंदू को इस भूमि से होगा प्यार नही,

कौन है जो उसके खातिर है खुला मोक्ष का द्वार नही,

निर्मोही भी पूर्ण पर्व पर जाने को तैयार है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।