माँ रख ले लाज गरीब दी

गुरु नानक देव जी
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माँ रख ले लाज गरीब दी रख ले लाज गरीब दी,

तू लेखा दी लेख लिखाई मेरी बदल दे रेख नसीब दी,

रख ले लाज गरीब दी.....

अधनिया तो भी अधना है मैं नीविया तो भी निवा,

तू ही दस सिर ऊंचा करके किवे जग ते जीवा,

ऊंचे सिर नु हों सलामा करे इज्जत जग उस जीव दी,

जेहड़े गलियां दे कख चुकदे माँ तू लखा वादे किते,

नेत्र हीं जो द्वारे आये तू अखा वाले किते,

लूले लंगड़े पाउंदे भंगड़े दर गूंगे करण तहजीब भी,

रख ले लाज गरीब दी

जिस ते तेरी किरपा होवे राज करे ओह जग ते,

उस दे परदे तू ही कजे केसर लावे पग ते,

उस पग ते हाथ तेरा रेह्न्दा नहियो जन्दी बेश रकीब दी,

रख ले लाज गरीब दी

गुरु नानक दियां अखा विच नूर तेरा मैं दिखया,

नानक नाम ध्या के वेहड़ा रीजा किता मीठा,

मक्के जा पावया मक्का सकीय शोभा लिखी हब्बीब दी,

रख ले लाज गरीब दी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।