हरी मैं नैनहीन तुम नैना

संत सूरदास
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

हे गिरधर गोपाल

करुणा सिंधु कृपाल

भक्त-वत्सल सबके सम्बल

मोकू लेओ संभाल

हरी मैं नैनहीन,तुम नैना

निर्बल के बल,दीन के बंधू

वचन सुन के बैना

हरी मैं नैनहीन,तुम नैना

थाम उँगरिया जौंन डगरिया लै चालो मोहे जानो

तुम्हरी शरण में तुम्हरे चरण में अब मेरो ठौर ठिकानों

गोपाल...गोपाल...

हरी तुम ही आंधे की लकुटिया

तुम ही जिया को चैना

हरी मैं नैनहीन,तुम नैना

दरसन ते सुख,बिन दरसन दुःख

प्रभु मेरो मनवा पावे

तुम देखे मेरो सूरज ऊगे

तुम बिछड़े छुप जावे

गोपाल...गोपाल..

अपने पतित को बेगी उबारो

नाम रटो दिन- रैना

हरी मैं नैनहीन,तुम नैना

हे गिरधर गोपाल

श्यामा दीन दयाल

भक्त-वत्सल सबके सम्बल

मोकू लेओ संभाल

गोपाल..गोपाल..

गोपाल...गोपाल..

फिल्म : चिंतामणि सूरदास

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।