घुंघरू बाजे रे बजरंग नाचे रे

सौरभ मधुकर
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

घुंघरू बाजे रे,बजरंग नाचे रे

सियाराम की धुन पे ये नाचे

घुंघरू बाजे रे,बजरंग नाचे रे

बजरंग बाला हुआ मतवाला दीवाना श्री राम का

हांथो में खड़ताल बजाये राम नाम गुण गाये

छम छम नाचे रे..छम छम नाचे रे..

सियाराम निरख के मुस्काये

घुंघरू बाजे रे,बजरंग नाचे रे

ऐसी मस्ती बलि पर छायी भुलाई सुध आप की

सीने में सियाराम बिराजे,झूमे नाच दिखाए

सुध बिसराई जी..सुध बिसराई जी..

सियाराम का मनवा हरसाये

घुंघरू बाजे रे,बजरंग नाचे रे

तेरे जैसा नहीं कोई दूजा भगत श्री राम का

राम नाम का ओढ़ दुशाला थिरके बजरंग बाला

प्यारा लागे रे..सोड़ा लागे रे..

हर्ष राम सिया के मन भाये

घुंघरू बाजे रे,बजरंग नाचे रे

घुंघरू बाजे रे,बजरंग नाचे रे

सियाराम की धुन पे ये नाचे

घुंघरू बाजे रे,बजरंग नाचे रे

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।