मेरो मन अनत कहाँ सुख पावे

संत सूरदास
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॥ पावन पाठ ॥

मेरो मन अनत कहाँ सुख पावे

जैसे उड़ी जहाज को पंछी,पुनि जहाज पे आवे

मेरो मन अनत कहाँ..अनत कहाँ सुख पावे

कमल नयन कौ छाड़ि महातम

और देव को ध्यावे

परम गंग को छाड़ि पिया सौ

दुर्मति कूप खनावे

मेरो मन अनत कहाँ..अनत कहाँ सुख पावे

जिहि मधुकर अम्बुज रस चाख्यो

क्यूं करील फल भावे

सूरदास प्रभु कामधेनु तजि छेरी कौन दुहावै

मेरो मन अनत कहाँ..अनत कहाँ सुख पावे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।