तुम तजि और कौन पे जाऊं

संत सूरदास
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

छेड़ी के पूछत लोग के प्रेम को रोग रे सूर लाग्यो तोहे कब ते

बाँवरो मैं भयो बाल गोपाल को रावरो रूप बस्यो हिय जब ते

हरी गुण गाई के मांगी के खाई के जोड़ी के हाँथ कहु यही सब ते

शीश नबे जिनके घनश्याम को शीश नबे काहू और को नब ते

बोलो हे ....बोलो हे...बोलो हे..गोपाल

तुम तजि और कौन पे जाऊं

काके द्वार जाहि सिर नाउँ

परहथ कहाँ बिकाऊ

तुम तजि और कौन पे जाऊं

फिल्म : चिंतामणि सूरदास

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।