गंगा यमुना सरस्वती संगम की महिमा निराली

पारंपरिक
माता सरस्वती भजन विविध भजन saraswati
॥ पावन पाठ ॥

गंगा यमुना सरस्वती संगम की महिमा निराली,

इनके तट पर लगा है कुंभ का मेला भारी,

आया मेला कुंभ का आया सबको अमृत पिलाने आया,

माघ मॉस में सूरए देव जब मकर राशि में आते,

तीर्थ राज प्राग में पावन कुंभ का योग बनाते,

देव दान मोह के झगडे में अमृत कुंभ छलक ता,

गंगा यमुना सरस्वती संगम में अमृत गिरत्ता,

अमृतां कराने आया सबको अमिरत पिलाने आया,

आया मेला कुंभ का आया .........

गंगा यमुना सरस्वती की बहती अमृत धारा,

जो उसमे आशनां करे उसे मिले मोक्ष का द्वारा,

दवादश माधव किरपा करे अक्षय भट छाया पाते,

कुंभ का जल पी कर के वो हरी चरणों मे वस जाते,

भव से मुक्ति दिलाने आया सबको अमृत पिलाने आया,

आया मेला कुंभ का आया .........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।