मेरो छोटो सो कन्हीया बड़ो प्यारो लागे री

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरो छोटो सो कन्हीया बड़ो प्यारो लागे री |

प्यारो लागे री, बड़ो प्यारो लागे री ||

जाके सर पे मुकुट विराज रहे री |

वाकी लत घुंघरारी बड़ी प्यारी लागे री ||

वाके नैना मतवारे, रतनारे लागे री |

मेरे मन मे वो जैसे कोई पीर लागे री ||

प्यारी प्यारी मृदु मुस्कानी न्यारी लागे री |

वाकी चाल मतवारी गजवारी लागी रे ||

वाको देखे बिना नैन मे ना चेन ना आवे री |

वाकी छवि सुधि करी सारी रात जावे री ||

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।