श्याम मोरे नैनन आगे रहियो

मीरा बाई
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

श्याम मोरे नैनन आगे रहियो

कन्हैया मोरे नैनन आगे रहियो

नाथ मोरे नैनन आगे रहियो

कन्हैया मोरे नैनन आगे रहियो

हरिजी मोरे

जय हो

श्याम मोरे

जय हो

कन्हैया मोरे

नैनन आगे रहियो

भव सागर में जीवन नैय्या

कोई नहीं है मेरा खेवया

अबकी बेर प्रभु डूब ना जाऊ

तू मोहे पार लगैया

तू मोहे पार लगैया

कन्हैया मोरे

जय हो

श्याम मोरे

जय हो

नाथ मोरे

नैनन आगे रहियो

श्याम मोरे नैनन आगे रहियो

कन्हैया मोरे नैनन आगे रहियो

नाथ मोरे नैनन आगे रहियो

कन्हैया मोरे नैनन आगे रहियो

सब दर छोड़ तेरे दर आई

ऐ मनमोहन मेरे कन्हाई

शरण पड़े की लाज रखो हरी

इस जग को नाथ बचइयो

श्याम मोरे

जय हो

कन्हैया मोरे

जय हो

नाथ मोरे

नैनन आगे रहियो

कन्हैया मोरे नैनन आगे रहियो

कन्हैया मोरे नैनन आगे रहियो

मरती बेर जग पीठ दिखावे

कोउ ना कोई के संग में जावे

रुक रुक प्राण कंठ जब आवे

तू मोरे सन्मुख रहियो

श्याम मोरे

जय हो

कन्हैया मोरे

जय हो

नाथ मोरे

नैनन आगे रहियो

कन्हैया मोरे नैनन आगे रहियो

कन्हैया मोरे नैनन आगे रहियो

हरिजी मोरे

नैनन आगे रहियो

मीरा के प्रभु गिरधर नागर

तुम हो नाथ दया के सागर

जनम मरण के बंधन काटो

मोहे दीना नाथ बचइयो

नाथ मोरे नैनन आगे रहियो

कन्हैया मोरे नैनन आगे रहियो

हरिजी मोरे

नैनन आगे रहियो

कन्हैया मोरे नैनन आगे रहियो

श्याम मोरे नैनन आगे रहियो

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।