आज रविवार है सुरये देव का वार है

पारंपरिक
सूर्य देव भजन विविध भजन surya
॥ पावन पाठ ॥

आज रविवार है सुरये देव का वार है,

इन से जग उजयार है,

नव ग्रहो में शक्तिशाली महिमा अप्रम पार है,

नव ग्रहो में सूर्ये देव ही सब से पहले आते है,

बाकी सारे ग्रह तो इनकी परिकर्मा लगाते है,

तेज तो अपार है सूर्ये देव का वार है,

नव ग्रहो में शक्तिशाली महिमा अप्रम पार है,

रवि वार को सूर्ये देव को जल जो अर्पित करते है,

पाप ताप से मुक्त होते खाली झोली बारते है,

भव से होते पार है सूर्ये देव का वार है,

नव ग्रहो में शक्तिशाली महिमा अप्रम पार है,

यम यमुना शनि देव जी इनका तो परिवार है,

जिनकी तेज से तीनो लोक में हो जाता उजयार है,

मिट जाता अंधियार है सूर्ये देव का वार है,

नव ग्रहो में शक्तिशाली महिमा अप्रम पार है,

माँ गायत्री मंतर है प्यारा सूर्य देव को भाता है,

रविवार को एक माला मंत्र जो ये जप जाता है,

हो जाता उधार हिअ सूर्ये देव का वार है,

नव ग्रहो में शक्तिशाली महिमा अप्रम पार है,

नव ग्रहो में शक्तिशाली महिमा अप्रम पार है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।