साई की मन भावनी मूरत

रहीम दास
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॥ पावन पाठ ॥

साई की मन भावनी मूरत मन में है समाई,

साई धुन की एक अजीब दीवानगी सी छाई,

मैं हुआ दीवाना हो लोगो हुआ दीवाना,

मैं साई का दीवाना मैं बाबा का दीवाना,

साई नैनो में झाको तो सदा झलक ता प्यार है,

साई के हाथो में देखो पतला ये संसार है,

अब तो साई दवार को छोड़ और कही ना जाना,

साई नाम की माला का मैं बन जाओ इक दाना,

मैं हुआ दीवाना हो लोगो हुआ दीवाना,

घर में ना आंगन में ये दिल लगता है न गुलशन में,

मित्रो में परिवार में न साथी के संग मधुवन,

तू ही रहीम तू ही राम तू ही मेरा कान्हा,

क्यों जाऊ मैं मथुरा काशी क्यों जाऊ मदीना,

मैं हुआ दीवाना हो लोगो हुआ दीवाना,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।