कांधे देना साई अर्जी है हमारी,

पारंपरिक
माँ गंगा भजन साईं भजन ganga
॥ पावन पाठ ॥

कागा सब तन खाइयो चुन चुन खाइयो मांस,

ये दो नैना मत खाइयो मुझे साई दर्शन की आस,

बांस की छइयां जाए गी सवारी,

कांधे देना साई अर्जी है हमारी,

ना ही दीया ना ही बाती तेरे दर पे आया हु,

नैनो की थाली में गंगा जल लाया हु,

कही जन्मो से साई अखियां है प्यासी मेरी,

देदो दर्शन साई अर्जी है हमारी,

तुझबीण साई बाबा ये जीवन अगोरा,

तूने ही तो इस जीवन का आस किया पूरा,

तेरे भरोसे साई चलती है सांसे मेरी,

लगा लो मुझको गले से अर्जी है हमारी,

चलते चलते मैं हारा हु जीवन की राहो में,

देदो साई और मुझको इन चरणों की छाओ में,

तेरे चौखठ पे आया हु बन के सवाली साई,

निराश मुझको न करना अर्जी है हमारी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।