मैनु रोक ना गुरुआ दे दर जा लेंदे

संत रविदास
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॥ पावन पाठ ॥

मैनु रोक ना गुरुआ दे दर जा लेंदे,

दात मुक्ति दी दाता कोलो पा लेंदे,

मैनु रोक ना गुरुआ दे दर जा लेंदे,

रख साम्ब के तू राज पुत्त दी शान नु,

एहना खोल न तू अपनी जुबान नु,

ओ है जंग आसमानी किती दुनिया दीवानी,

मैनु रब जाहे गुरु नु मनान लेंदे,

मैनु रोक ना गुरुआ दे दर जा लेंदे,

ओहदे जेहा नहीं यहां विच देखिया,

ओहदे कदमा च ताहियो माथा टेक्या,

मेरी चली दा सहारा मैनु जान तो प्यारा,

जाता पाता वाला भरम मिटा लेंदे,

मैनु रोक ना गुरुआ दे दर जा लेंदे,

मणि राज दाज माल ते जागीर,

गुरु रविदास रब दा वजीर,

ओहदे बन मीठे बोल रेह्न्दा रब ओहदे कॉल,

मैनु जग वलो मुख परता लेनदे,

मैनु रोक ना गुरुआ दे दर जा लेंदे,

पोडा पोडा मेरा कट वाडे माँ,

मैनु सूली उते भावे लटकादे माँ,

मैं ता गुरु कॉल जाना दिल गुरु दा दीवाना,

नवे गुरु दे जान तू मैनु ला लेनदे,

मैनु रोक ना गुरुआ दे दर जा लेंदे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।