मंगल मूरति मारुती नंदन

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

मंगल मूरति मारुती नंदन

सकल अमंगल मूल निकंदन

पवन तनय संतन हितकारी

हृदय विराजत अवध बिहारी

मात पिता गुरु गणपत शारद

शिवा समेत शभु सुक नारद

चरण बंदी बिनवौ सब काहू

देहु राम पद नेह निबाहू

बन्दहुँ राम लखन बैदेही

यह तुलसी के प्रमा सनेही

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।