॥ पावन पाठ ॥
मन मोहना बड़े झूठे,
हार के हार नहीं माने |
बन के खिलाडी पिया,
निकले अनाड़ी |
मोसे बईमानी की,
मुझ से ही रूठे ||
तुम्हारी यह बंसी कहना,
बनी गल फंसी |
तान सूना के मेरा,
तन मन लूटे ||
मन मोहना बड़े झूठे,
हार के हार नहीं माने |
बन के खिलाडी पिया,
निकले अनाड़ी |
मोसे बईमानी की,
मुझ से ही रूठे ||
तुम्हारी यह बंसी कहना,
बनी गल फंसी |
तान सूना के मेरा,
तन मन लूटे ||