सत्संगत में रोज ही जाना रहना

पारंपरिक
माँ गंगा भजन विविध भजन ganga
॥ पावन पाठ ॥

सत्संगत में रोज ही जाना रहना अपनी धुन में,

साधु भाई गांजा पियो गुरु संग में,

चित चेतन की चिलम बनाले ले धोवो गंगाजल में,

ज्ञान की साफी खूब निचोड़ो पानी रहे ना उनमे,

साधु भाई.......

जर्दा तंबाकू खूब मिलाओ केसर चंदन उनमें,

चेतन होकर अग्नि चलाओ जल जाए जोत गगन में,

साधु भाई............

गांजा पी वन से ज्ञान बढ़ता है सुरता लगे भजन में,

ज्ञानी होकर गंजो न पीवे बड़ी भूल है मन में,

साधु भाई...........

नाथ गुलाब मिला गुरु पूरा ध्यान दियो सुमिरन में,

भानी नाथ शरण सतगुरु की भजन बनाएं पुष्कर में,

साधु भाई............

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।