मन की आखों से मै देखूँ रूप सदा सियाराम का

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

दोहा : किस काम के यह हीरे मोती, जिस मे ना दिखे मेरे राम |

राम नहीं तो मेरे लिए है व्यर्थ स्वर्ग का धाम ||

मन की आखों से मै देखूँ रूप सदा सियाराम का |

कभी ना सूना ना रहता आसन मेरे मन के धाम का ||

राम चरण की धुल मिले तो तर जाये संसारी |

दो अक्षर के सुमिरन से ही दूर हो विपता सारी ||

धरती अम्बर गुण गाते है मेरे राम के नाम का ||

हर काया मे राम की छाया, मूरख समझ ना पाया |

मन्दिर, पत्थर मे क्यों ढूंढे, तेरे मन मे समाया ||

जिस मे मेरे राम नहीं है, वो मेरे किस काम का ||

दुखियो का दुःख हरने वाले भक्त की लाज बचाओ |

हंसी उड़ाने वालो को प्रभु चमत्कार दिखलाओ ||

मेरे मन के मन्दिर मे है मेरे प्रभु का धाम |

मेरे अंतर के आसन पर सदा विराजे राम ||

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।