मुझ में हर रंग अब तुम्हारा है

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॥ पावन पाठ ॥

मंजिल मिली, मुराद मिली, मुदा मिला,

सब कुछ मुझे मिला, जो तेरा नक्श-ऐ-पा मिला |

जब दूर तक ना कोई, फकीर आशना मिला,

तेरा नियाज़-मंद, तेरे दर से जा मिला |

मुझ में हर रंग अब तुम्हारा है,

अब तो कह दो, के तू हमारा है |

आलम-ऐ-शोक में, ना जाने क्यों,

मेने हर दम, तुम्हें पुकारा है |

तू तो सब ही के पास है मोजूद,

कोन कहता है, तू हमारा है |

तेरे सदके में ये तमाम जहान,

अपनी ठोकर पे मेने मारा है |

राज़ को राज़ क्यों समझते हो,

राज़ दुनिया पे आशिकारा है |

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।