इश्क़ हुआ साई जो तुमसे

रहीम दास
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॥ पावन पाठ ॥

इश्क़ हुआ साई जो तुमसे गया ज़माना भूल,

चाहत में तेरी कांटे अब तो लगने लगे है फूल,

इश्क़ हुआ साई जो तुमसे गया ज़माना भूल,

जब से खुदी को मैंने मिटाया तब से तेरा इश्क़ है पाया,

आशिक़ हो गया तेरा साई हमदम अपना तुझे बनाया,

तू ही मेरे ईश्वर अल्ल्हा तू ही मेरा रसूल,

इश्क़ हुआ साई जो तुमसे गया ज़माना भूल,

आशिक़ हु तेरा दीवाना सारे यहाँ से हु बेगैना,

तेरे नाम का याम पिया है मस्त हुआ हु मैं मस्ताना,

रेहभर तेरी राह पे चलना लगता है माकूफ

इश्क़ हुआ साई जो तुमसे गया ज़माना भूल,

इश्क़ तेरा है ज़िंदगी मेरी इश्क़ तेरा है बंदगी मेरी,

इश्क़ में साई जीना मरणा और भला क्या हम को करना,

सिर माथे में चाहु लगाना चरणों की तेरी धूल,

इश्क़ हुआ साई जो तुमसे गया ज़माना भूल,

कर्म कमा कुछ ऐसा साई हरदम हां तेरे गुण गाउ,

तेरी बाते तेरे किस्से बाबा तुझमें ही खो जाऊ,

कर परवीन को अपने तरानो में मशहूर,

इश्क़ हुआ साई जो तुमसे गया ज़माना भूल,,

राम रहीम कृष्ण करीमा तुझमे मका और मदीना,

तेरे नाम से आ बस ता हु जैसे अंगूठी और नगीना,

तेरी भगियां का हु मैं साई इक अधना सा फूल,

इश्क़ हुआ साई जो तुमसे गया ज़माना भूल,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।