कंकर कंकर से मैं पूछूं शंकर मेरा कहाँ है

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

कंकर कंकर से मैं पूछूं, शंकर मेरा कहाँ है, कोई बताये |

शिखर शिखर से पूंछ रही हूँ, शंकर मेरा कहाँ है |

गौरी वर, गंगाधर हर हर, शंकर मेरा कहाँ है ||

ओ, नील गगन की चन्द्रकला, तू रहती उन के पास भला |

मेरा कहाँ गया प्रीतम बतला, मेरी बिगड़ी कौन बनाये ||

हौले हौले चल फनिधर, मै भी तेरे संग चलूँ |

तू लिपटेगा गले स्वामी के, मै चरणों मे रह लूँ , मेरा धन्य जीवन हो जाए ||

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।