गजसिन शनि महाराज

पारंपरिक
शनि देव भजन शनि देव भजन shani
॥ पावन पाठ ॥

हर पल हर घडी है मुझको ये आभास,

ये तन मेरा ये मन रहता है तुम्हारे पास,

सब कष्ट हरे सब दुःख हरे,

किये दूर सारे त्रास,

ओ गजसिन शनि महाराज,

ये दादू तुम्हारा है दास,

सब से सरल अराधना तुम्हारी,

सब से सरल उपासना तुम्हारी,

तुम न्याए प्रिये हो तुम धर्म प्रिये हो,

नही करते हो कोई हाश,

ओ गजसिन शनि महाराज,

हम सब है तुम्हारे ही दास,

निलंजन समाभासं रवि पुत्रं यमाग्रजम,

छाया मार्तण्ड सम भुतं तम नमामि शन्सचरं ॥

जब जब जिसने तुमको पुकारा,

बदला नसीब दिया उसको सहारा,

दी तुमने छमा है की तुमने दया है

जो आया तुम्हारे पास

ओ गजसिंन शनि महाराज

हम सब है तुम्हारे ही दास

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।