दर्शन देना प्राण प्यारे

पण्डित भीमसेन जोशी
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

दर्शन देना प्राण प्यारे |

नंदलाला मेरे नैनो के प्यारे ||

दीनानाथ दयाल सकल गुण,

नवकिशोर सुन्दर मुख वारे |

मनमोहन मन रुक्तल रोक्यो,

दर्शन की चित चाह हमारे |

रसिक खुशाल मिलन की आशा,

निसदिन सुमरण ध्यान लगा रे |

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।