चढ़ गई चढ़ गई जी मेनू नाम वाली मस्ती

पारंपरिक
माँ गंगा भजन गुरुदेव भजन ganga
॥ पावन पाठ ॥

चढ़ गई चढ़ गई जी मेनू नाम वाली मस्ती,

जब सत्संग गुरु जी करदे,

मुखो अमृत वर्षा करदे,

मिट गई जी मेरी मैं वाली हस्ती,

चढ़ गई चढ़ गई जी मेनू नाम वाली मस्ती...

सतगुरु दे चरना विच बह के,

ज्ञान वाली गंगा विच बह के,

लग गई जी पार आसा वाली कश्ती,

चढ़ गई चढ़ गई जी मेनू नाम वाली मस्ती...

मतलब दी ऐह रिश्ते दारी,

मतलब दी ऐह दुनिया सारी,

बस गई जी मन खुशिया दी बस्ती,

चढ़ गई चढ़ गई जी मेनू नाम वाली मस्ती...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।