पानी में मीन प्यासी

संत कबीर
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॥ पावन पाठ ॥

मोहे सुन सुन आवे हासी पानी में मीन प्यासी,

आतम ज्ञान बिना नर भटके कोई मथुरा कोई काशी,

मिरगा न भी वसे कस्तूरी बन बन फिरत उदासी,

पानी में मीन प्यासी......

जल बीच कवल कवल बीच कलियाँ,

ता पर भवर निवासी,

सो मन बस तिरलोक बहियो है यति सीत सन्यासी,

पानी में मीन प्यासी...

जातो धान धरे निशवाशर मुनि जन सहस अठासी,

सो तेरे घट माही विराजे परम पुरष अविनाशी,

पानी में मीन प्यासी,

है हाज़िर तोहे दूर बता वे दूर की बात निरासी,

कहे कबीर सुनो भाई साधो गुरु बिन बरहम ना जासी,

पानी में मीन प्यासी...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।