आया शरण ठोकरें जग की खा के

पारंपरिक
विष्णु भगवान भजन विविध भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

आया शरण ठोकरें जग की खा के,

हटूंगा प्रभु तेरी दया दृष्टि पाके।

पहले मगन हो सुखी नींद सोया,

सब कुछ पाने का सपना संजोया।

मिला तो वहो जो लाया लिखा के,

आया शरण ठोकरें जग की खा के॥

मान यह काया का है बस छलावा,

रावण सा मानी भी बचने ना पाया।

रखूंगा कहाँ तक मैं खुद को बचा के,

आया शरण ठोकरें जग की खा के॥

कर्मो की लीला बड़ी है निराली,

हरिश्चंद्र मरघट की करे रखवाली।

समझ में यह आया सब कुछ लुटा के,

आया शरण ठोकरें जग की खा के॥

ना है चाह कोई, ना है कोई इच्छा,

अपनी दया की मुझे दे दो भिक्षा।

जिसे सबने छोड़ा उसे तू ही राखे,

आया शरण ठोकरें जग की खा के॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।