दर दर जाके जो न मिला

पारंपरिक
माता सरस्वती भजन साईं भजन saraswati
॥ पावन पाठ ॥

रब जैसा दिखने वाला तकदीर लिखने वाला,

मिल गया मुझे तकदीर से दर दर जाके जो न मिला,

वो मिल गया एक फ़कीर से,

भर गया दामन शारदा शबुरी से,

दर दर जाके जो न मिला,

जिस दिन से मिले साईं की दुआ,

इस दिल को किसी दुःख ने न छुया,

बाबा की धुनी में जल कर मेरे फिकर का जंगल भसम हुआ,

मेरे हाथो पे रख के हाथ उसने दिया एसा आशीर्वाद उसने

दुःख मिट गए हर एक लकीर के,

दर दर जाके जो न मिला,

मन जब साईं को याद करे दीदार की जब फरयाद करे मुझे

एसा लगता है जैसे वो बाते मेरे साथ करे,

जब श्रधा मेरी भुलाती है आवाज साईं की आती है,

साईं की हर तस्वीर से दर दर जाकर जो न मिला वो मिल गया एक फ़कीर से

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।